उर्दू शायरी की गहराइयाँ आज भी दिलों को छूती हैं, खासकर जब आधुनिक शायरों की कलम से निकलती हैं। इस सीरीज की दूसरी कड़ी में हम बशीर बद्र, शकील आज़मी, जावेद अख्तर, महशर आफरीदी और अमर इकबाल जैसे शायरों की उन लाइनों पर फोकस कर रहे हैं, जो अरबी और फारसी के जटिल शब्दों से सजी हैं। ये लाइनें भावनाओं की गहराई को बयाँ करती हैं और जीवन के विभिन्न पहलुओं को छूती हैं। प्रत्येक मतला/मकता के नीचे कठिन शब्दों के अर्थ दिए गए हैं, जिसमें शब्द की उत्पत्ति, हिंदी अर्थ और पर्यायवाची शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ब्रैकेट में हिंदी अर्थ [हिंदी] और अंग्रेजी अर्थ [English] दिए गए हैं।
यहाँ 50 चुनिंदा लाइनें हैं, जो आधुनिक शायरों से ली गई हैं और पिछली सीरीज से अलग हैं।
| क्रमांक | मतला/मकता (देवनागरी में) | मतला/मकता का अर्थ | कठिन शब्द | अर्थ (उत्पत्ति, हिंदी अर्थ और पर्यायवाची, [हिंदी], [English]) |
|---|---|---|---|---|
| 1 | हमारे गम पे चमन की फजा ने तंज किया (शायर: बशीर बद्र) | हमारे दुख पर बगीचे की हवा ने व्यंग्य किया, अर्थात प्रकृति भी दर्द का मजाक उड़ाती है। | फजा, तंज | फजा (फ़ारसी, हवा या वातावरण, [हवा], [atmosphere, air]); तंज (अरबी, व्यंग्य या ताना, [व्यंग्य], [satire, taunt]) |
| 2 | कोई समझे तो एक बात कहूँ इश्क तौफीक है (शायर: बशीर बद्र) | कोई समझे तो एक बात कहूँ इश्क तौफीक है, अर्थात प्रेम ईश्वरीय अनुग्रह है। | तौफीक | तौफीक (अरबी, अनुग्रह या योग्यता, [अनुग्रह], [divine grace, ability]) |
| 3 | कोई हाथ भी न मिलाए तो क्या हुआ (शायर: बशीर बद्र) | कोई हाथ भी न मिलाए तो क्या हुआ, अर्थात अकेलेपन में भी जीवन चलता है। | मिलाए | मिलाए (फ़ारसी, मिलाना या join, [मिलाना], [join, unite]) |
| 4 | यूंही बे-सबब न फिरा करो कोई शाम घर भी रहा करो (शायर: बशीर बद्र) | यूंही बिना वजह न फिरा करो कोई शाम घर भी रहा करो, अर्थात स्थिरता जरूरी है। | बे-सबब | बे-सबब (फ़ारसी, बिना वजह या causeless, [बिना वजह], [without reason]) |
| 5 | वो गजल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो (शायर: बशीर बद्र) | वो गजल की सच्ची किताब है उसे चुपके चुपके पढ़ा करो, अर्थात प्रेम को गहराई से समझो। | गजल | गजल (अरबी, गजल या lyric poem, [गजल], [ghazal]) |
| 6 | कोई तोहफा न सही तोहफा ए हमदर्दी ही सही (शायर: शकील आज़मी) | कोई तोहफा न सही तोहफा ए हमदर्दी ही सही, अर्थात सहानुभूति का उपहार। | तोहफा, हमदर्दी | तोहफा (फ़ारसी, उपहार या gift, [उपहार], [gift]); हमदर्दी (अरबी, सहानुभूति या sympathy, [सहानुभूति], [sympathy]) |
| 7 | हार हो जाती है जब मान लिया जाता है (शायर: शकील आज़मी) | हार हो जाती है जब मान लिया जाता है, अर्थात हार स्वीकार करने से होती है। | हार | हार (फ़ारसी, हार या defeat, [हार], [defeat]) |
| 8 | अपनी मंजिल पे पहुंचना भी खड़े रहना भी कितना (शायर: शकील आज़मी) | अपनी मंजिल पे पहुंचना भी खड़े रहना भी कितना, अर्थात मंजिल तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण है। | मंजिल | मंजिल (अरबी, मंजिल या destination, [मंजिल], [destination]) |
| 9 | खुद को इतना भी मत बचाया कर (शायर: शकील आज़मी) | खुद को इतना भी मत बचाया कर, अर्थात जोखिम लो। | बचाया | बचाया (फ़ारसी, बचाना या save, [बचाना], [save]) |
| 10 | बस एक पुकार पे दरवाजा खोल देते हैं (शायर: शकील आज़मी) | बस एक पुकार पे दरवाजा खोल देते हैं, अर्थात कॉल पर दरवाजा खुलता है। | पुकार | पुकार (फ़ारसी, पुकार या call, [पुकार], [call]) |
| 11 | कोई महरम न रहा घर का न रहा (शायर: जावेद अख्तर) | कोई महरम न रहा घर का न रहा, अर्थात कोई अपना न रहा। | महरम | महरम (अरबी, अपना या intimate, [अपना], [intimate relative]) |
| 12 | ये जो हम तुम अलग अलग हैं ये हमारी मजबूरी है (शायर: जावेद अख्तर) | ये जो हम तुम अलग अलग हैं ये हमारी मजबूरी है, अर्थात अलगाव मजबूरी है। | मजबूरी | मजबूरी (फ़ारसी, मजबूरी या compulsion, [मजबूरी], [compulsion]) |
| 13 | वो जो आँखों से बयाँ होती हैं बातें (शायर: जावेद अख्तर) | वो जो आँखों से बयाँ होती हैं बातें, अर्थात आँखों से व्यक्त बातें। | बयाँ | बयाँ (फ़ारसी, बयान या express, [बयान], [express]) |
| 14 | तर्कश में तीर हैं सब के लिए (शायर: जावेद अख्तर) | तर्कश में तीर हैं सब के लिए, अर्थात बाण सबके लिए। | तर्कश | तर्कश (फ़ारसी, तरकश या quiver, [तरकश], [quiver]) |
| 15 | कोई नया हुक्मनामा जारी किया (शायर: जावेद अख्तर) | कोई नया हुक्मनामा जारी किया, अर्थात नया आदेश जारी। | हुक्मनामा | हुक्मनामा (फ़ारसी, आदेश या decree, [आदेश], [decree]) |
| 16 | तेरी खता नहीं के तू गुस्से में आ गया (शायर: महशर आफरीदी) | तेरी खता नहीं के तू गुस्से में आ गया, अर्थात गुस्सा आना गलती नहीं। | खता | खता (फ़ारसी, गलती या fault, [गलती], [fault]) |
| 17 | हम ने सरकुन पर कये शाह जफर देखे हैं (शायर: महशर आफरीदी) | हम ने सरकुन पर कये शाह जफर देखे हैं, अर्थात कई राजा देखे हैं। | सरकुन | सरकुन (फ़ारसी, सिर पर या on head, [सिर पर], [on head]) |
| 18 | सब से बेजार हो गया हूँ मैं जेहनी बीमार हो गया हूँ मैं (शायर: महशर आफरीदी) | सब से बेजार हो गया हूँ मैं जेहनी बीमार हो गया हूँ मैं, अर्थात सब से ऊब गया हूँ। | बेजार, जेहनी | बेजार (फ़ारसी, ऊबा हुआ या disgusted, [ऊबा], [disgusted]); जेहनी (अरबी, मानसिक या mental, [मानसिक], [mental]) |
| 19 | डंसा गया हूं मैं (शायर: महशर आफरीदी) | डंसा गया हूं मैं, अर्थात काटा गया हूँ। | डंसा | डंसा (फ़ारसी, काटा या stung, [काटा], [stung]) |
| 20 | तेरा गुरूर तो मेरे कद से आ गया (शायर: महशर आफरीदी) | तेरा गुरूर तो मेरे कद से आ गया, अर्थात घमंड मेरी ऊंचाई से। | गुरूर | गुरूर (अरबी, घमंड या pride, [घमंड], [pride]) |
| 21 | पहले हमारी आँख में बीनाई आई थी (शायर: अमर इकबाल) | पहले हमारी आँख में बीनाई आई थी, अर्थात पहले दृष्टि आई। | बीनाई | बीनाई (फ़ारसी, दृष्टि या sight, [दृष्टि], [sight]) |
| 22 | जरा सी देर (शायर: अमर इकबाल) | जरा सी देर, अर्थात थोड़ी देर। | जरा | जरा (फ़ारसी, थोड़ा या little, [थोड़ा], [little]) |
| 23 | एक ही बात मुझ में अच्छी है और मैं बस (शायर: अमर इकबाल) | एक ही बात मुझ में अच्छी है और मैं बस, अर्थात एक ही अच्छी बात। | बस | बस (फ़ारसी, बस या only, [बस], [only]) |
| 24 | ये जो मैं हूँ जरा सा बाकी हूँ वो (शायर: अमर इकबाल) | ये जो मैं हूँ जरा सा बाकी हूँ वो, अर्थात मैं थोड़ा बाकी हूँ। | बाकी | बाकी (अरबी, बाकी या remaining, [बाकी], [remaining]) |
| 25 | वक्त ऐसा है के जो इस में दरिंदा नहीं है (शायर: अमर इकबाल) | वक्त ऐसा है के जो इस में दरिंदा नहीं है, अर्थात समय में क्रूरता। | दरिंदा | दरिंदा (फ़ारसी, क्रूर या beast, [क्रूर], [beast]) |
| 26 | कोई महकम न रहा (शायर: बशीर बद्र) | कोई महकम न रहा, अर्थात कोई मजबूत न रहा। | महकम | महकम (अरबी, मजबूत या strong, [मजबूत], [strong]) |
| 27 | इश्क की दशवारियाँ (शायर: बशीर बद्र) | इश्क की दशवारियाँ, अर्थात प्रेम की कठिनाइयाँ। | दशवारियाँ | दशवारियाँ (फ़ारसी, कठिनाइयाँ या hardships, [कठिनाइयाँ], [hardships]) |
| 28 | एहतमाम ज़िंदगी इश्क देख (शायर: जावेद अख्तर) | एहतमाम ज़िंदगी इश्क देख, अर्थात जीवन की व्यवस्था प्रेम से। | एहतमाम | एहतमाम (अरबी, व्यवस्था या arrangement, [व्यवस्था], [arrangement]) |
| 29 | बे-मायगी का दर्द (शायर: शकील आज़मी) | बे-मायगी का दर्द, अर्थात निर्धनता का दर्द। | बे-मायगी | बे-मायगी (फ़ारसी, निर्धनता या poverty, [निर्धनता], [poverty]) |
| 30 | सर-ए-दश्त अगरचे भला तो लगता है (शायर: महशर आफरीदी) | सर-ए-दश्त अगरचे भला तो लगता है, अर्थात जंगल में अच्छा लगता है। | सर-ए-दश्त, अगरचे | सर-ए-दश्त (फ़ारसी, जंगल का सिरा या wilderness, [जंगल], [wilderness]); अगरचे (फ़ारसी, हालांकि या although, [हालांकि], [although]) |
| 31 | सुकूत-ए-शहर अगर भला तो लगता है (शायर: बशीर बद्र) | सुकूत-ए-शहर अगर भला तो लगता है, अर्थात शहर की खामोशी अच्छी लगती है। | सुकूत | सुकूत (अरबी, खामोशी या silence, [खामोशी], [silence]) |
| 32 | रिंदान-ए-मयकदे अगर खुदा जाने क्या हुआ (शायर: शकील आज़मी) | रिंदान-ए-मयकदे अगर खुदा जाने क्या हुआ, अर्थात मदिरालय के शराबी। | रिंदान, मयकदे | रिंदान (फ़ारसी, शराबी या drinkers, [शराबी], [drinkers]); मयकदे (फ़ारसी, मदिरालय या tavern, [मदिरालय], [tavern]) |
| 33 | बाम-ए-फलक अगर हाल फरिश्तों का था अजब (शायर: जावेद अख्तर) | बाम-ए-फलक अगर हाल फरिश्तों का था अजब, अर्थात आकाश की छत पर स्वर्गदूत। | बाम-ए-फलक | बाम-ए-फलक (फ़ारसी, आकाश की छत, [आकाश], [sky roof]) |
| 34 | दम-ब-खुद थे मिरे हाल-ए-जार पर (शायर: महशर आफरीदी) | दम-ब-खुद थे मिरे हाल-ए-जार पर, अर्थात चुपचाप बुरी हालत पर। | दम-ब-खुद, हाल-ए-जार | दम-ब-खुद (फ़ारसी, चुपचाप, [चुप], [silent]); हाल-ए-जार (अरबी, बुरी हालत, [बुरी हालत], [miserable state]) |
| 35 | खूबां-ए-लाला-फाम मुझे देखते रहे (शायर: अमर इकबाल) | खूबां-ए-लाला-फाम मुझे देखते रहे, अर्थात सुंदर tulip रंग वाले। | खूबां-ए-लाला-फाम | खूबां-ए-लाला-फाम (फ़ारसी, tulip रंग वाले सुंदर, [सुंदर], [beautiful tulip-colored]) |
| 36 | लम्स मिरी धड़कने बढ़ाते हैं (शायर: बशीर बद्र) | लम्स मिरी धड़कने बढ़ाते हैं, अर्थात स्पर्श धड़कनें बढ़ाते हैं। | लम्स | लम्स (अरबी, स्पर्श या touch, [स्पर्श], [touch]) |
| 37 | गुजारना किसे कहते हैं जानता हूँ मैं (शायर: शकील आज़मी) | गुजारना किसे कहते हैं जानता हूँ मैं, अर्थात जीवन व्यतीत करना। | गुजारना | गुजारना (फ़ारसी, व्यतीत करना या pass, [व्यतीत], [to pass time]) |
| 38 | तमाम रात घड़ी देखती रही मुझको (शायर: जावेद अख्तर) | तमाम रात घड़ी देखती रही मुझको, अर्थात पूरी रात समय देखती रही। | तमाम | तमाम (फ़ारसी, पूरी या entire, [पूरी], [entire]) |
| 39 | सुकून-ए-दिल के लिए (शायर: महशर आफरीदी) | सुकून-ए-दिल के लिए, अर्थात दिल की शांति के लिए। | सुकून | सुकून (अरबी, शांति या peace, [शांति], [peace]) |
| 40 | निगाह ए काफ से इक बार देखिए (शायर: अमर इकबाल) | निगाह ए काफ से इक बार देखिए, अर्थात नजर से देखिए। | निगाह | निगाह (फ़ारसी, नजर या glance, [नजर], [glance]) |
| 41 | तगाफुल के बाद आए (शायर: बशीर बद्र) | तगाफुल के बाद आए, अर्थात अनदेखी के बाद। | तगाफुल | तगाफुल (अरबी, अनदेखी या neglect, [अनदेखी], [neglect]) |
| 42 | इजहार ए इश्क के (शायर: शकील आज़मी) | इजहार ए इश्क के, अर्थात प्रेम का इजहार। | इजहार | इजहार (अरबी, व्यक्त करना या expression, [व्यक्त], [expression]) |
| 43 | उफक से आगे जहां और भी हैं (शायर: जावेद अख्तर) | उफक से आगे जहां और भी हैं, अर्थात क्षितिज से आगे। | उफक | उफक (फ़ारसी, क्षितिज या horizon, [क्षितिज], [horizon]) |
| 44 | बिछड़ते वक्त उन आँखों में थी हमारी गजल (शायर: महशर आफरीदी) | बिछड़ते वक्त उन आँखों में थी हमारी गजल, अर्थात विदाई में कविता। | गजल | गजल (अरबी, गजल या poem, [गजल], [ghazal]) |
| 45 | शर्म-शार सजदों ने (शायर: अमर इकबाल) | शर्म-शार सजदों ने, अर्थात लज्जित प्रार्थनाएँ। | शर्म-शार | शर्म-शार (फ़ारसी, शर्मसार या ashamed, [शर्मसार], [ashamed]) |
| 46 | सिफत ये सिर्फ खुदा की है (शायर: बशीर बद्र) | सिफत ये सिर्फ खुदा की है, अर्थात गुण ईश्वर का। | सिफत | सिफत (अरबी, खासियत या attribute, [खासियत], [attribute]) |
| 47 | दवाम की है तलब-गार जिंस-ए-फानी भी (शायर: शकील आज़मी) | दवाम की है तलब-गार जिंस-ए-फानी भी, अर्थात नश्वर की अनंत इच्छा। | दवाम, तलब-गार, जिंस-ए-फानी | दवाम (अरबी, अनंतता, [अनंतता], [eternity]); तलब-गार (फ़ारसी, मांगने वाला, [मांगने वाला], [seeker]); जिंस-ए-फानी (अरबी, नश्वर चीज, [नश्वर], [perishable]) |
| 48 | रगों में खून भी बहता है और पानी भी (शायर: जावेद अख्तर) | रगों में खून भी बहता है और पानी भी, अर्थात रक्त और पानी का मिश्रण। | रगों | रगों (फ़ारसी, नसें या veins, [नसें], [veins]) |
| 49 | खिलाफ अपने तरफदार देखिए (शायर: महशर आफरीदी) | खिलाफ अपने तरफदार देखिए, अर्थात विरोधी समर्थक। | तरफदार | तरफदार (फ़ारसी, समर्थक या supporter, [समर्थक], [supporter]) |
| 50 | फूंक देते हैं जिगर की आग में जोबन (शायर: अमर इकबाल) | फूंक देते हैं जिगर की आग में जोब |

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