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उर्दू शायरी के अनमोल रहस्य: आधुनिक शायरों की 50 विशेष कठिन लाइनें और उनके अर्थ (सीरीज 4)

 


उर्दू शायरी की अनमोल धरोहर में आधुनिक शायरों की कलम से निकली लाइनें जीवन की जटिलताओं को बड़े ही खूबसूरती से बयां करती हैं। इस सीरीज की चौथी कड़ी में हम बशीर बद्र, शकील आज़मी, जावेद अख्तर, महशर आफरीदी और अम्मार इकबाल जैसे शायरों की उन चुनिंदा लाइनों पर रोशनी डाल रहे हैं, जो अरबी और फारसी के गहन शब्दों से सजी हैं। ये लाइनें प्रेम, दुख, जीवन और समाज के विभिन्न आयामों को छूती हैं। प्रत्येक मतला/मकता के नीचे कठिन शब्दों के अर्थ दिए गए हैं, जिसमें शब्द की उत्पत्ति, हिंदी अर्थ और पर्यायवाची शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ब्रैकेट में हिंदी अर्थ [हिंदी] और अंग्रेजी अर्थ [English] दिए गए हैं।

यहाँ 50 नई चुनिंदा लाइनें हैं, जो समकालीन शायरों से ली गई हैं और पिछली सीरीज से अलग हैं।

क्रमांकमतला/मकता (देवनागरी में)मतला/मकता का अर्थकठिन शब्दअर्थ (उत्पत्ति, हिंदी अर्थ और पर्यायवाची, [हिंदी], [English])
1आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा (शायर: बशीर बद्र)आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा, अर्थात दिखाई दिया लेकिन दिल में नहीं उतरा।उतरउतर (फ़ारसी, उतरना या descend, [उतरना], [descend, enter])
2अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा (शायर: बशीर बद्र)अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा, अर्थात खोजने पर कोई मिल जाता है।तलाशतलाश (फ़ारसी, खोज या search, [खोज], [search, quest])
3न जी भर के देखा न कुछ बात की (शायर: बशीर बद्र)न जी भर के देखा न कुछ बात की, अर्थात न पूरी तरह देखा न बात की।जी भर केजी भर के (फ़ारसी, जी भरकर या to heart's content, [जी भरकर], [to heart's content])
4सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है (शायर: बशीर बद्र)सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है, अर्थात सिर से पाँव तक गुलाब का पेड़ लगता है।शजरशजर (अरबी, पेड़ या tree, [पेड़], [tree])
5सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा (शायर: बशीर बद्र)सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा, अर्थात श्रद्धा से पत्थर देव बन जाता है।देवतादेवता (फ़ारसी, देव या deity, [देव], [deity])
6परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है (शायर: शकील आज़मी)परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है, अर्थात पंख फैलाओ तो दुनिया उड़ान देखती है।उड़ानउड़ान (फ़ारसी, उड़ान या flight, [उड़ान], [flight])
7मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल (शायर: शकील आज़मी)मुझ पे हैं सैकड़ों इल्ज़ाम मिरे साथ न चल, अर्थात मुझ पर इल्ज़ाम हैं, साथ न चलो।इल्ज़ामइल्ज़ाम (अरबी, इल्ज़ाम या accusation, [इल्ज़ाम], [accusation])
8हर घड़ी चश्म-ए-ख़रीदार में रहने के लिए (शायर: शकील आज़मी)हर घड़ी चश्म-ए-ख़रीदार में रहने के लिए, अर्थात हर पल खरीदार की नज़र में रहने के लिए।चश्म-ए-ख़रीदारचश्म-ए-ख़रीदार (फ़ारसी, खरीदार की नज़र या buyer's eye, [नज़र], [buyer's glance])
9दर्द की हद से गुज़ारे तो सभी जाएँगे (शायर: शकील आज़मी)दर्द की हद से गुज़ारे तो सभी जाएँगे, अर्थात दर्द की हद पार करने पर सब जाते हैं।हदहद (अरबी, हद या limit, [हद], [limit])
10कुछ इस तरह से मिलें हम भी गले मिलने लगे (शायर: शकील आज़मी)कुछ इस तरह से मिलें हम भी गले मिलने लगे, अर्थात ऐसे मिलें कि गले लगें।गले मिलनेगले मिलने (फ़ारसी, गले लगना या embrace, [गले लगना], [embrace])
11तुम को देखा तो ये ख़याल आया (शायर: जावेद अख्तर)तुम को देखा तो ये ख़याल आया, अर्थात तुम्हें देखा तो ये विचार आया।ख़यालख़याल (अरबी, विचार या thought, [विचार], [thought])
12जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता (शायर: जावेद अख्तर)जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता, अर्थात जहाँ सब जाते हैं वो अच्छा नहीं लगता।जिधरजिधर (फ़ारसी, जहाँ या where, [जहाँ], [where])
13तमन्ना फिर मचल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ (शायर: जावेद अख्तर)तमन्ना फिर मचल जाए अगर तुम मिलने आ जाओ, अर्थात इच्छा फिर उभर आए अगर तुम मिलो।तमन्ना, मचलतमन्ना (फ़ारसी, इच्छा या desire, [इच्छा], [desire]); मचल (फ़ारसी, उभरना या stir, [उभरना], [stir])
14जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो (शायर: जावेद अख्तर)जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो, अर्थात जीना कठिन है या आसान देखो।मुश्किलमुश्किल (अरबी, कठिन या difficult, [कठिन], [difficult])
15कभी कभी मैं ये सोचता हूँ कि मुझ को तेरी तलाश (शायर: जावेद अख्तर)कभी कभी मैं ये सोचता हूँ कि मुझ को तेरी तलाश, अर्थात कभी सोचता हूँ तेरी खोज।तलाशतलाश (फ़ारसी, खोज या search, [खोज], [search])
16लब-ए-साहिल समुंदर की फ़रावानी से मर जाऊँ (शायर: महशर आफरीदी)लब-ए-साहिल समुंदर की फ़रावानी से मर जाऊँ, अर्थात किनारे पर सागर की प्रचुरता से मर जाऊँ।लब-ए-साहिल, फ़रावानीलब-ए-साहिल (फ़ारसी, किनारे का होंठ या shore lip, [किनारा], [shore]); फ़रावानी (फ़ारसी, प्रचुरता या abundance, [प्रचुरता], [abundance])
17इतना मजबूर न कर बात बनाने लग जाएँ (शायर: महशर आफरीदी)इतना मजबूर न कर बात बनाने लग जाएँ, अर्थात इतना मजबूर न करो कि बातें बनाने लगें।मजबूरमजबूर (अरबी, मजबूर या compelled, [मजबूर], [compelled])
18ये सोचता हूँ चराग़ों का एहतिमाम करूँ (शायर: महशर आफरीदी)ये सोचता हूँ चराग़ों का एहतिमाम करूँ, अर्थात सोचता हूँ दीपकों की व्यवस्था करूँ।चराग़ों, एहतिमामचराग़ों (फ़ारसी, दीपकों या lamps, [दीपक], [lamps]); एहतिमाम (अरबी, व्यवस्था या arrangement, [व्यवस्था], [arrangement])
19अना का बोझ कभी जिस्म से उतार के देख (शायर: महशर आफरीदी)अना का बोझ कभी जिस्म से उतार के देख, अर्थात अहंकार का बोझ शरीर से उतार के देखो।अनाअना (अरबी, अहंकार या ego, [अहंकार], [ego])
20तेरे होंठों के तबस्सुम का तलबगार हूँ मैं (शायर: महशर आफरीदी)तेरे होंठों के तबस्सुम का तलबगार हूँ मैं, अर्थात तेरी मुस्कान का चाहने वाला हूँ।तबस्सुम, तलबगारतबस्सुम (अरबी, मुस्कान या smile, [मुस्कान], [smile]); तलबगार (फ़ारसी, चाहने वाला या seeker, [चाहने वाला], [seeker])
21अक्स कितने उतर गए मुझ में (शायर: अम्मार इकबाल)अक्स कितने उतर गए मुझ में, अर्थात कितने प्रतिबिंब उतर गए मुझ में।अक्सअक्स (फ़ारसी, प्रतिबिंब या reflection, [प्रतिबिंब], [reflection])
22रंग-ओ-रस की हवस और बस (शायर: अम्मार इकबाल)रंग-ओ-रस की हवस और बस, अर्थात रंग और रस की लालसा बस।रंग-ओ-रस, हवसरंग-ओ-रस (फ़ारसी, रंग और रस या color and essence, [रंग और रस], [color and essence]); हवस (अरबी, लालसा या lust, [लालसा], [lust])
23मुझ से बनता हुआ तू तुझ को बनाता हुआ मैं (शायर: अम्मार इकबाल)मुझ से बनता हुआ तू तुझ को बनाता हुआ मैं, अर्थात मुझसे बनता तू, तुझे बनाता मैं।बनताबनता (फ़ारसी, बनना या forming, [बनना], [forming])
24तख़य्युल को बरी करने लगा हूँ (शायर: अम्मार इकबाल)तख़य्युल को बरी करने लगा हूँ, अर्थात कल्पना को मुक्त करने लगा हूँ।तख़य्युल, बरीतख़य्युल (अरबी, कल्पना या imagination, [कल्पना], [imagination]); बरी (अरबी, मुक्त या acquitted, [मुक्त], [acquitted])
25खुद-परस्ती से इश्क़ हो गया है (शायर: अम्मार इकबाल)खुद-परस्ती से इश्क़ हो गया है, अर्थात स्वार्थ से प्रेम हो गया है।खुद-परस्तीखुद-परस्ती (फ़ारसी, स्वार्थ या selfishness, [स्वार्थ], [selfishness])
26जहल को आगही बनाते हुए (शायर: अम्मार इकबाल)जहल को आगही बनाते हुए, अर्थात अज्ञान को ज्ञान बनाते हुए।जहल, आगहीजहल (अरबी, अज्ञान या ignorance, [अज्ञान], [ignorance]); आगही (फ़ारसी, ज्ञान या awareness, [ज्ञान], [awareness])
27रात से जंग कोई खेल नहीं (शायर: अम्मार इकबाल)रात से जंग कोई खेल नहीं, अर्थात रात से लड़ना खेल नहीं।जंगजंग (फ़ारसी, युद्ध या war, [युद्ध], [war])
28तुम चरागों में इतना तेल नहीं (शायर: अम्मार इकबाल)तुम चरागों में इतना तेल नहीं, अर्थात तुममें इतनी ऊर्जा नहीं।चरागोंचरागों (फ़ारसी, दीपकों या lamps, [दीपक], [lamps])
29आ गया हूँ तो खींच अपनी तरफ (शायर: अम्मार इकबाल)आ गया हूँ तो खींच अपनी तरफ, अर्थात आ गया हूँ तो आकर्षित करो।तरफतरफ (अरबी, दिशा या side, [दिशा], [side])
30मेरी जानिब मुझे धकेल नहीं (शायर: अम्मार इकबाल)मेरी जानिब मुझे धकेल नहीं, अर्थात मेरी ओर धकेलो नहीं।जानिबजानिब (अरबी, ओर या towards, [ओर], [towards])
31जब मैं चाहूँगा छोड़ जाऊँगा (शायर: अम्मार इकबाल)जब मैं चाहूँगा छोड़ जाऊँगा, अर्थात इच्छा पर छोड़ूँगा।चाहूँगाचाहूँगा (फ़ारसी, चाहना या desire, [चाहना], [desire])
32इक सराए है जिस्म जेल नहीं (शायर: अम्मार इकबाल)इक सराए है जिस्म जेल नहीं, अर्थात शरीर सराय है, जेल नहीं।सराएसराए (फ़ारसी, सराय या inn, [सराय], [inn])
33ज़मीन पर घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं (शायर: महशर आफरीदी)ज़मीन पर घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं, अर्थात दुनिया में स्वर्ग सोचते हैं।जन्नतजन्नत (अरबी, स्वर्ग या paradise, [स्वर्ग], [paradise])
34मुझे जिस हाल में छोड़ा उसी हालत में पाओगी (शायर: महशर आफरीदी)मुझे जिस हाल में छोड़ा उसी हालत में पाओगी, अर्थात नहीं बदला।हाल, हालतहाल (अरबी, हालत या condition, [हालत], [condition]); हालत (अरबी, स्थिति या state, [स्थिति], [state])
35अक्ल और इश्क लड़ते रहे देर तक (शायर: महशर आफरीदी)अक्ल और इश्क लड़ते रहे देर तक, अर्थात बुद्धि और प्रेम का संघर्ष।अक्ल, इश्कअक्ल (अरबी, बुद्धि या intellect, [बुद्धि], [intellect]); इश्क (अरबी, प्रेम या love, [प्रेम], [love])
36दिल परिंदा है तेरे जाल में फंस जाता है (शायर: शकील आज़मी)दिल परिंदा है तेरे जाल में फंस जाता है, अर्थात दिल जाल में फंस जाता है।परिंदा, जालपरिंदा (फ़ारसी, पक्षी या bird, [पक्षी], [bird]); जाल (फ़ारसी, जाल या net, [जाल], [net])
37जल्द या देर से मारे तो सभी जायेंगे (शायर: शकील आज़मी)जल्द या देर से मारे तो सभी जायेंगे, अर्थात मौत सबको आएगी।मारेमारे (फ़ारसी, मारा या killed, [मारा], [killed])
38दर्द की हद से गुजरे तो सभी जाएंगे (शायर: शकील आज़मी)दर्द की हद से गुजरे तो सभी जाएंगे, अर्थात दर्द की सीमा पार।हदहद (अरबी, सीमा या limit, [सीमा], [limit])
39कोई तोहफा न सही तोहफा ए हमदर्दी ही सही (शायर: शकील आज़मी)कोई तोहफा न सही तोहफा ए हमदर्दी ही सही, अर्थात सहानुभूति का उपहार।तोहफा, हमदर्दीतोहफा (फ़ारसी, उपहार या gift, [उपहार], [gift]); हमदर्दी (अरबी, सहानुभूति या sympathy, [सहानुभूति], [sympathy])
40हार हो जाती है जब मान लिया जाता है (शायर: शकील आज़मी)हार हो जाती है जब मान लिया जाता है, अर्थात हार स्वीकार करने से होती है।हारहार (फ़ारसी, हार या defeat, [हार], [defeat])
41अपनी मंजिल पे पहुंचना भी खड़े रहना भी कितना (शायर: शकील आज़मी)अपनी मंजिल पे पहुंचना भी खड़े रहना भी कितना, अर्थात मंजिल पहुंचना चुनौती।मंजिलमंजिल (अरबी, मंजिल या destination, [मंजिल], [destination])
42खुद को इतना भी मत बचाया कर (शायर: शकील आज़मी)खुद को इतना भी मत बचाया कर, अर्थात जोखिम लो।बचायाबचाया (फ़ारसी, बचाना या save, [बचाना], [save])
43बस एक पुकार पे दरवाजा खोल देते हैं (शायर: शकील आज़मी)बस एक पुकार पे दरवाजा खोल देते हैं, अर्थात कॉल पर खुलता है।पुकारपुकार (फ़ारसी, पुकार या call, [पुकार], [call])
44कोई महरम न रहा घर का न रहा (शायर: जावेद अख्तर)कोई महरम न रहा घर का न रहा, अर्थात कोई अपना न रहा।महरममहरम (अरबी, अपना या intimate, [अपना], [intimate])
45ये जो हम तुम अलग अलग हैं ये हमारी मजबूरी है (शायर: जावेद अख्तर)ये जो हम तुम अलग अलग हैं ये हमारी मजबूरी है, अर्थात अलगाव मजबूरी है।मजबूरीमजबूरी (फ़ारसी, मजबूरी या compulsion, [मजबूरी], [compulsion])
46वो जो आँखों से बयाँ होती हैं बातें (शायर: जावेद अख्तर)वो जो आँखों से बयाँ होती हैं बातें, अर्थात आँखों से व्यक्त बातें।बयाँबयाँ (फ़ारसी, बयान या express, [बयान], [express])
47तर्कश में तीर हैं सब के लिए (शायर: जावेद अख्तर)तर्कश में तीर हैं सब के लिए, अर्थात तरकश में बाण सबके लिए।तर्कशतर्कश (फ़ारसी, तरकश या quiver, [तरकश], [quiver])
48कोई नया हुक्मनामा जारी किया (शायर: जावेद अख्तर)कोई नया हुक्मनामा जारी किया, अर्थात नया आदेश जारी।हुक्मनामाहुक्मनामा (फ़ारसी, आदेश या decree, [आदेश], [decree])
49हमारे शौक़ की ये इंतिहा थी (शायर: जावेद अख्तर)हमारे शौक़ की ये इंतिहा थी, अर्थात हमारे शौक की ये हद थी।शौक़, इंतिहाशौक़ (अरबी, शौक या hobby, [शौक], [hobby]); इंतिहा (अरबी, हद या extreme, [हद], [extreme])
50बिछड़ के डार से झुकते हैं सर हमारे (शायर: जावेद अख्तर)बिछड़ के डार से झुकते हैं सर हमारे, अर्थात बिछड़ने से सिर झुकते हैं।डारडार (फ़ारसी, डाल या branch, [डाल], [branch])

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