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उर्दू शायरी के अनसुलझे रहस्य: समकालीन शायरों की 50 अनोखी कठिन लाइनें और उनके अर्थ (सीरीज 6)

 


उर्दू शायरी की अनसुलझी दुनिया में समकालीन शायरों की कलम से निकली लाइनें जीवन की गहराइयों को छूती हैं। इस सीरीज की छठी कड़ी में हम फैज अहमद फैज, साहिर लुधियानवी, कैफी आजमी, मजरूह सुल्तानपुरी और फिराक गोरखपुरी जैसे शायरों की उन चुनिंदा लाइनों पर फोकस कर रहे हैं, जो अरबी और फारसी के गहन शब्दों से सजी हैं। ये लाइनें प्रेम, संघर्ष, समाज और दर्शन के विभिन्न आयामों को उजागर करती हैं। प्रत्येक मतला/मकता के नीचे कठिन शब्दों के अर्थ दिए गए हैं, जिसमें शब्द की उत्पत्ति, हिंदी अर्थ और पर्यायवाची शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, ब्रैकेट में हिंदी अर्थ [हिंदी] और अंग्रेजी अर्थ [English] दिए गए हैं।

यहाँ 50 नई चुनिंदा लाइनें हैं, जो समकालीन शायरों से ली गई हैं और पिछली सीरीज से अलग हैं।

क्रमांकमतला/मकता (देवनागरी में)मतला/मकता का अर्थकठिन शब्दअर्थ (उत्पत्ति, हिंदी अर्थ और पर्यायवाची, [हिंदी], [English])
1रंजिश-ए-ज़माना से गुज़र गए हम (शायर: फैज अहमद फैज)समय की नाराजगी से गुजर गए हम, अर्थात समय के दुख से गुजर गए।रंजिश-ए-ज़मानारंजिश-ए-ज़माना (फ़ारसी, समय की नाराजगी या era's grudge, [समय की नाराजगी], [era's grudge])
2तफ़रीक़-ए-मज़हब ने बाँट दिया दुनिया को (शायर: फैज अहमद फैज)धर्म की विभेद ने दुनिया को बाँट दिया, अर्थात धर्म ने दुनिया बाँटी।तफ़रीक़-ए-मज़हबतफ़रीक़-ए-मज़हब (अरबी, धर्म का विभेद या religious distinction, [धर्म का विभेद], [religious distinction])
3गम-ए-इश्क ने सताया रात दिन (शायर: फैज अहमद फैज)प्रेम के दुख ने सताया रात दिन, अर्थात प्रेम का दुख सताया।गम-ए-इश्कगम-ए-इश्क (फ़ारसी, प्रेम का दुख या love's sorrow, [प्रेम का दुख], [love's sorrow])
4तक़दीर की तक़सीम में हिस्सा मिला कम (शायर: फैज अहमद फैज)भाग्य के बंटवारे में हिस्सा मिला कम, अर्थात भाग्य में कम मिला।तक़दीर, तक़सीमतक़दीर (अरबी, भाग्य या fate, [भाग्य], [fate]); तक़सीम (अरबी, बंटवारा या division, [बंटवारा], [division])
5शिकवा-ए-क़िस्मत से थक गया दिल (शायर: फैज अहमद फैज)किस्मत की शिकायत से थक गया दिल, अर्थात किस्मत की शिकायत से थका दिल।शिकवा-ए-क़िस्मतशिकवा-ए-क़िस्मत (फ़ारसी, किस्मत की शिकायत या fate's complaint, [किस्मत की शिकायत], [fate's complaint])
6बाज़ार-ए-दुनिया में सब बिकता है यहाँ (शायर: साहिर लुधियानवी)दुनिया के बाजार में सब बिकता है यहाँ, अर्थात दुनिया में सब बिकाऊ।बाज़ार-ए-दुनियाबाज़ार-ए-दुनिया (फ़ारसी, दुनिया का बाजार या world's market, [दुनिया का बाजार], [world's market])
7तमाशा-ए-ज़िंदगी में दर्शक बना रहा (शायर: साहिर लुधियानवी)जीवन के तमाशे में दर्शक बना रहा, अर्थात जीवन के नाटक में दर्शक रहा।तमाशा-ए-ज़िंदगीतमाशा-ए-ज़िंदगी (फ़ारसी, जीवन का तमाशा या life's spectacle, [जीवन का तमाशा], [life's spectacle])
8रुसवाई की हद से गुज़र गया दिल (शायर: साहिर लुधियानवी)अपमान की हद से गुजर गया दिल, अर्थात अपमान की हद पार की।रुसवाईरुसवाई (फ़ारसी, अपमान या disgrace, [अपमान], [disgrace])
9तफ़क्कुर की गहराई में खो गया हूँ (शायर: साहिर लुधियानवी)चिंतन की गहराई में खो गया हूँ, अर्थात विचार की गहराई में खोया।तफ़क्कुरतफ़क्कुर (अरबी, चिंतन या contemplation, [चिंतन], [contemplation])
10वुजूद की तलाश में लगा रहा जीवन (शायर: साहिर लुधियानवी)अस्तित्व की खोज में लगा रहा जीवन, अर्थात जीवन अस्तित्व की तलाश में।वुजूद, तलाशवुजूद (अरबी, अस्तित्व या existence, [अस्तित्व], [existence]); तलाश (फ़ारसी, खोज या search, [खोज], [search])
11दिल-ए-नादाँ को समझाया बहुत (शायर: कैफी आजमी)अज्ञानी दिल को समझाया बहुत, अर्थात अज्ञानी दिल को समझाया।दिल-ए-नादाँदिल-ए-नादाँ (फ़ारसी, अज्ञानी दिल या ignorant heart, [अज्ञानी दिल], [ignorant heart])
12कू-ए-जानाँ में गुज़ारा रातें (शायर: कैफी आजमी)प्रिय की गली में गुजारी रातें, अर्थात प्रेमी की गली में रातें गुजारी।कू-ए-जानाँकू-ए-जानाँ (फ़ारसी, प्रिय की गली या beloved's lane, [प्रिय की गली], [beloved's lane])
13सर-ए-बाज़ार याद ने रुसवा किया (शायर: कैफी आजमी)बाजार में याद ने अपमानित किया, अर्थात याद ने सार्वजनिक अपमान किया।सर-ए-बाज़ार, रुसवासर-ए-बाज़ार (फ़ारसी, बाजार में या in market, [बाजार में], [in market]); रुसवा (फ़ारसी, अपमानित या disgraced, [अपमानित], [disgraced])
14तूफान-ए-ज़िंदगी से लड़ता रहा (शायर: कैफी आजमी)जीवन के तूफान से लड़ता रहा, अर्थात जीवन के तूफान से लड़ा।तूफान-ए-ज़िंदगीतूफान-ए-ज़िंदगी (फ़ारसी, जीवन का तूफान या life's storm, [जीवन का तूफान], [life's storm])
15बे-वफ़ा की याद ने सताया (शायर: कैफी आजमी)बेवफा की याद ने सताया, अर्थात बेवफा की याद ने पीड़ा दी।बे-वफ़ाबे-वफ़ा (फ़ारसी, बेवफा या unfaithful, [बेवफा], [unfaithful])
16तक़दीर की तक़सीर ने तोड़ा दिल (शायर: मजरूह सुल्तानपुरी)भाग्य की गलती ने दिल तोड़ा, अर्थात भाग्य की गलती ने दिल तोड़ा।तक़दीर, तक़सीरतक़दीर (अरबी, भाग्य या fate, [भाग्य], [fate]); तक़सीर (अरबी, गलती या fault, [गलती], [fault])
17गम-ए-दुनिया ने घेरा चारों तरफ (शायर: मजरूह सुल्तानपुरी)दुनिया के दुख ने घेरा चारों तरफ, अर्थात दुनिया का दुख चारों ओर घेरा।गम-ए-दुनियागम-ए-दुनिया (फ़ारसी, दुनिया का दुख या world's sorrow, [दुनिया का दुख], [world's grief])
18शिकवा-ए-इश्क से थक गया हूँ (शायर: मजरूह सुल्तानपुरी)प्रेम की शिकायत से थक गया हूँ, अर्थात प्रेम की शिकायत से थका।शिकवा-ए-इश्कशिकवा-ए-इश्क (फ़ारसी, प्रेम की शिकायत या love's complaint, [प्रेम की शिकायत], [love's complaint])
19बाज़ार-ए-इश्क में खो गया दिल (शायर: मजरूह सुल्तानपुरी)प्रेम के बाजार में खो गया दिल, अर्थात प्रेम के बाजार में दिल खोया।बाज़ार-ए-इश्कबाज़ार-ए-इश्क (फ़ारसी, प्रेम का बाजार या love's market, [प्रेम का बाजार], [love's market])
20तफ़क्कुर की राह पर चला जीवन (शायर: मजरूह सुल्तानपुरी)चिंतन की राह पर चला जीवन, अर्थात जीवन चिंतन की राह पर चला।तफ़क्कुरतफ़क्कुर (अरबी, चिंतन या contemplation, [चिंतन], [contemplation])
21वुजूद की तलाश में लगा रहा दिल (शायर: फिराक गोरखपुरी)अस्तित्व की खोज में लगा रहा दिल, अर्थात दिल अस्तित्व की तलाश में लगा।वुजूद, तलाशवुजूद (अरबी, अस्तित्व या existence, [अस्तित्व], [existence]); तलाश (फ़ारसी, खोज या search, [खोज], [search])
22रंजिश-ए-दुनिया से गुज़र गया हूँ (शायर: फिराक गोरखपुरी)दुनिया की नाराजगी से गुजर गया हूँ, अर्थात दुनिया की नाराजगी से गुजरा।रंजिश-ए-दुनियारंजिश-ए-दुनिया (फ़ारसी, दुनिया की नाराजगी या world's grudge, [दुनिया की नाराजगी], [world's grudge])
23तफ़रीक़-ए-ज़ात ने तोड़ा दिल (शायर: फिराक गोरखपुरी)आत्म विभेद ने दिल तोड़ा, अर्थात आत्म विभेद ने दिल तोड़ा।तफ़रीक़-ए-ज़ाततफ़रीक़-ए-ज़ात (अरबी, आत्म विभेद या self-distinction, [आत्म विभेद], [self-distinction])
24शिकवा-ए-ज़माना ने सताया बहुत (शायर: फिराक गोरखपुरी)समय की शिकायत ने सताया बहुत, अर्थात समय की शिकायत ने सताया।शिकवा-ए-ज़मानाशिकवा-ए-ज़माना (फ़ारसी, समय की शिकायत या era's complaint, [समय की शिकायत], [era's complaint])
25बे-वफ़ा की याद में खो गया हूँ (शायर: फिराक गोरखपुरी)बेवफा की याद में खो गया हूँ, अर्थात बेवफा की याद में खोया।बे-वफ़ाबे-वफ़ा (फ़ारसी, बेवफा या unfaithful, [बेवफा], [unfaithful])
26तूफान-ए-इश्क में बह गया दिल (शायर: फैज अहमद फैज)प्रेम के तूफान में बह गया दिल, अर्थात प्रेम के तूफान में बहा दिल।तूफान-ए-इश्कतूफान-ए-इश्क (फ़ारसी, प्रेम का तूफान या storm of love, [प्रेम का तूफान], [storm of love])
27रुसवाई की राह पर चला जीवन (शायर: फैज अहमद फैज)अपमान की राह पर चला जीवन, अर्थात अपमान की राह पर जीवन चला।रुसवाईरुसवाई (फ़ारसी, अपमान या disgrace, [अपमान], [disgrace])
28तक़दीर ने खेल खेला मेरे साथ (शायर: फैज अहमद फैज)भाग्य ने खेल खेला मेरे साथ, अर्थात भाग्य ने खेला मेरे साथ।तक़दीरतक़दीर (अरबी, भाग्य या fate, [भाग्य], [fate])
29गम-ए-ज़िंदगी ने घेरा चारों ओर (शायर: फैज अहमद फैज)जीवन के दुख ने घेरा चारों ओर, अर्थात जीवन का दुख चारों ओर घेरा।गम-ए-ज़िंदगीगम-ए-ज़िंदगी (फ़ारसी, जीवन का दुख या life's sorrow, [जीवन का दुख], [life's sorrow])
30शिकवा-ए-इश्क ने तोड़ा दिल (शायर: फैज अहमद फैज)प्रेम की शिकायत ने दिल तोड़ा, अर्थात प्रेम की शिकायत ने दिल तोड़ा।शिकवा-ए-इश्कशिकवा-ए-इश्क (फ़ारसी, प्रेम की शिकायत या love's complaint, [प्रेम की शिकायत], [love's complaint])
31बाज़ार-ए-ज़िंदगी में सब कुछ बिकता है (शायर: साहिर लुधियानवी)जीवन के बाजार में सब कुछ बिकता है, अर्थात जीवन में सब बिकाऊ।बाज़ार-ए-ज़िंदगीबाज़ार-ए-ज़िंदगी (फ़ारसी, जीवन का बाजार या life's market, [जीवन का बाजार], [life's market])
32तमाशा-ए-दुनिया में दर्शक बना रहा (शायर: साहिर लुधियानवी)दुनिया के तमाशे में दर्शक बना रहा, अर्थात दुनिया के नाटक में दर्शक रहा।तमाशा-ए-दुनियातमाशा-ए-दुनिया (फ़ारसी, दुनिया का तमाशा या world's spectacle, [दुनिया का तमाशा], [world's spectacle])
33रंजिश-ए-इश्क ने सताया बहुत (शायर: साहिर लुधियानवी)प्रेम की नाराजगी ने सताया बहुत, अर्थात प्रेम की नाराजगी ने सताया।रंजिश-ए-इश्करंजिश-ए-इश्क (फ़ारसी, प्रेम की नाराजगी या love's grudge, [प्रेम की नाराजगी], [love's grudge])
34तफ़रीक़-ए-ज़माना ने बाँट दिया दिल (शायर: साहिर लुधियानवी)समय की विभेद ने दिल बाँट दिया, अर्थात समय ने दिल बाँटा।तफ़रीक़-ए-ज़मानातफ़रीक़-ए-ज़माना (अरबी, समय का विभेद या era's distinction, [समय का विभेद], [era's distinction])
35गम-ए-क़िस्मत ने घेरा चारों तरफ (शायर: साहिर लुधियानवी)किस्मत के दुख ने घेरा चारों तरफ, अर्थात किस्मत का दुख चारों ओर घेरा।गम-ए-क़िस्मतगम-ए-क़िस्मत (फ़ारसी, किस्मत का दुख या fate's sorrow, [किस्मत का दुख], [fate's sorrow])
36शिकवा-ए-दुनिया से थक गया हूँ (शायर: कैफी आजमी)दुनिया की शिकायत से थक गया हूँ, अर्थात दुनिया की शिकायत से थका।शिकवा-ए-दुनियाशिकवा-ए-दुनिया (फ़ारसी, दुनिया की शिकायत या world's complaint, [दुनिया की शिकायत], [world's complaint])
37तक़दीर की राह पर चला दिल (शायर: कैफी आजमी)भाग्य की राह पर चला दिल, अर्थात भाग्य की राह पर दिल चला।तक़दीरतक़दीर (अरबी, भाग्य या fate, [भाग्य], [fate])
38बे-वफ़ा की याद ने तोड़ा दिल (शायर: कैफी आजमी)बेवफा की याद ने दिल तोड़ा, अर्थात बेवफा की याद ने दिल तोड़ा।बे-वफ़ाबे-वफ़ा (फ़ारसी, बेवफा या unfaithful, [बेवफा], [unfaithful])
39तूफान-ए-इश्क ने बहाया आंसू (शायर: कैफी आजमी)प्रेम के तूफान ने आंसू बहाया, अर्थात प्रेम के तूफान ने आंसू बहाए।तूफान-ए-इश्कतूफान-ए-इश्क (फ़ारसी, प्रेम का तूफान या storm of love, [प्रेम का तूफान], [storm of love])
40रुसवाई की हद पार की जीवन ने (शायर: कैफी आजमी)अपमान की हद पार की जीवन ने, अर्थात जीवन ने अपमान की हद पार की।रुसवाईरुसवाई (फ़ारसी, अपमान या disgrace, [अपमान], [disgrace])
41बाज़ार-ए-ज़िंदगी में खो गया हूँ (शायर: मजरूह सुल्तानपुरी)जीवन के बाजार में खो गया हूँ, अर्थात जीवन के बाजार में खोया।बाज़ार-ए-ज़िंदगीबाज़ार-ए-ज़िंदगी (फ़ारसी, जीवन का बाजार या life's market, [जीवन का बाजार], [life's market])
42तमाशा-ए-इश्क में दर्शक बना रहा (शायर: मजरूह सुल्तानपुरी)प्रेम के तमाशे में दर्शक बना रहा, अर्थात प्रेम के नाटक में दर्शक रहा।तमाशा-ए-इश्कतमाशा-ए-इश्क (फ़ारसी, प्रेम का तमाशा या love's spectacle, [प्रेम का तमाशा], [love's spectacle])
43रंजिश-ए-क़िस्मत ने सताया बहुत (शायर: मजरूह सुल्तानपुरी)किस्मत की नाराजगी ने सताया बहुत, अर्थात किस्मत की नाराजगी ने सताया।रंजिश-ए-क़िस्मतरंजिश-ए-क़िस्मत (फ़ारसी, किस्मत की नाराजगी या fate's grudge, [किस्मत की नाराजगी], [fate's grudge])
44तफ़रीक़-ए-दुनिया ने बाँट दिया दिल (शायर: मजरूह सुल्तानपुरी)दुनिया की विभेद ने दिल बाँट दिया, अर्थात दुनिया ने दिल बाँटा।तफ़रीक़-ए-दुनियातफ़रीक़-ए-दुनिया (अरबी, दुनिया का विभेद या world's distinction, [दुनिया का विभेद], [world's distinction])
45गम-ए-इश्क ने घेरा चारों तरफ (शायर: मजरूह सुल्तानपुरी)प्रेम के दुख ने घेरा चारों तरफ, अर्थात प्रेम का दुख चारों ओर घेरा।गम-ए-इश्कगम-ए-इश्क (फ़ारसी, प्रेम का दुख या love's sorrow, [प्रेम का दुख], [love's sorrow])
46शिकवा-ए-ज़िंदगी ने तोड़ा दिल (शायर: फिराक गोरखपुरी)जीवन की शिकायत ने दिल तोड़ा, अर्थात जीवन की शिकायत ने दिल तोड़ा।शिकवा-ए-ज़िंदगीशिकवा-ए-ज़िंदगी (फ़ारसी, जीवन की शिकायत या life's complaint, [जीवन की शिकायत], [life's complaint])
47तक़दीर की राह पर चला जीवन (शायर: फिराक गोरखपुरी)भाग्य की राह पर चला जीवन, अर्थात जीवन भाग्य की राह पर चला।तक़दीरतक़दीर (अरबी, भाग्य या fate, [भाग्य], [fate])
48बे-वफ़ा की याद ने तोड़ा दिल (शायर: फिराक गोरखपुरी)बेवफा की याद ने दिल तोड़ा, अर्थात बेवफा की याद ने दिल तोड़ा।बे-वफ़ाबे-वफ़ा (फ़ारसी, बेवफा या unfaithful, [बेवफा], [unfaithful])
49तूफान-ए-ज़िंदगी ने बहाया आंसू (शायर: फिराक गोरखपुरी)जीवन के तूफान ने आंसू बहाया, अर्थात जीवन के तूफान ने आंसू बहाए।तूफान-ए-ज़िंदगीतूफान-ए-ज़िंदगी (फ़ारसी, जीवन का तूफान या life's storm, [जीवन का तूफान], [life's storm])
50रुसवाई की हद पार की जीवन ने (शायर: फिराक गोरखपुरी)अपमान की हद पार की जीवन ने, अर्थात जीवन ने अपमान की हद पार की।रुसवाईरुसवाई (फ़ारसी, अपमान या disgrace, [अपमान], [disgrace])

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