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CBDT ने जारी किया Form 173A: सरकारी सिक्योरिटीज पर ब्याज और कैपिटल गेन की टैक्स छूट के लिए नई डिसक्लोजर अनिवार्य (Income Tax 2025)

 CBDT ने 19 अक्टूबर 2026 को Form 173A नोटिफाई किया। Income-tax Act, 2025 के तहत FII/FPI और BIS को सरकारी सिक्योरिटीज पर ब्याज व कैपिटल गेन की छूट क्लेम करने के लिए अब डिटेल्ड फॉर्म भरना होगा। जानें पात्रता, जरूरी डिटेल, प्रभाव और व्यावहारिक सलाह।


CBDT ने जारी किया Form 173A: सरकारी सिक्योरिटीज पर टैक्स छूट के लिए नई डिसक्लोजर जरूरी

भारत में टैक्स सिस्टम लगातार सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। ताजा खबर में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 19 अक्टूबर 2026 को CBDT ने Income-tax (Seventh Amendment) Rules, 2026 के जरिए नया Form 173A जारी किया है। यह फॉर्म उन टैक्सपेयर्स के लिए अनिवार्य है जो सरकारी सिक्योरिटीज (Government Securities) पर ब्याज आय और कैपिटल गेन की छूट क्लेम करना चाहते हैं।

यह बदलाव Income-tax Act, 2025 के तहत आया है। नए कानून में Schedule IV के एंट्री 13D और 13E के तहत कुछ खास निवेशकों को सरकारी सिक्योरिटीज पर मिलने वाली आय पर टैक्स छूट दी गई है। अब इस छूट का फायदा उठाने के लिए सिर्फ रिटर्न भरना काफी नहीं रहेगा। उन्हें Form 173A में डिटेल्ड जानकारी देनी होगी।

Form 173A क्या है और किसे भरना है?

Form 173A का पूरा नाम है – “Information to be furnished for claiming exemption on interest and capital gains from Government securities”। यह मुख्य रूप से दो कैटेगरी के निवेशकों के लिए है:

  1. Foreign Institutional Investors (FII) / Foreign Portfolio Investors (FPI) – एंट्री 13D के तहत।
  2. Bank for International Settlements (BIS) – एंट्री 13E के तहत।

सामान्य भारतीय निवेशकों या आम नागरिकों के लिए यह छूट उपलब्ध नहीं है। यानी अगर आप रेजिडेंट इंडिविजुअल हैं और सरकारी बॉन्ड या ट्रेजरी बिल्स में निवेश करते हैं, तो यह फॉर्म आप पर लागू नहीं होता। यह मुख्य रूप से विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए है, जो भारत के सरकारी सिक्योरिटीज में पैसा लगाते हैं।

फॉर्म में क्या-क्या डिटेल भरनी होंगी?

फॉर्म दो हिस्सों में बांटा गया है – Part A और Part B।

Part A (बेसिक डिटेल्स):

  • निवेशक का पूरा नाम
  • निवास का देश
  • पता (निवास या हेडक्वार्टर)
  • PAN
  • देश के टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर (TIN)
  • SEBI रजिस्ट्रेशन नंबर (FPI/FII के रूप में) – BIS के लिए ऑप्शनल
  • टैक्स ईयर
  • ईमेल और कॉन्टैक्ट नंबर

Part B (सिक्योरिटीज और आय की डिटेल): हर सिक्योरिटी के लिए अलग-अलग जानकारी देनी होगी:

  • ISIN नंबर
  • सिक्योरिटी का टाइप (Treasury Bills, Fixed Rate Bonds, Floating Rate Bonds, State Development Loans आदि)
  • टेनर (अवधि)
  • 1 अप्रैल को होल्डिंग की वैल्यू
  • साल के दौरान खरीदी गई सिक्योरिटीज की वैल्यू
  • साल के दौरान बेची गई सिक्योरिटीज का सेल कंसिडरेशन
  • 31 मार्च को होल्डिंग की वैल्यू
  • साल के दौरान मिली या अर्जित ग्रॉस इंटरेस्ट
  • साल के दौरान अर्जित कैपिटल गेन

अंत में एक डिक्लेरेशन भी देनी होती है कि दी गई जानकारी सही और Schedule IV के प्रावधानों के अनुरूप है। यह डिक्लेरेशन प्रिंसिपल ऑफिसर द्वारा साइन की जाती है।

यह बदलाव क्यों आया?

सरकार विदेशी निवेशकों को भारत के सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश के लिए आकर्षित करना चाहती है। 5 जून 2026 को वित्त मंत्रालय ने FPI को सरकारी सिक्योरिटीज पर ब्याज और कैपिटल गेन की छूट की घोषणा की थी। यह छूट 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है।

Form 173A का उद्देश्य है कि छूट का दावा सही तरीके से और पारदर्शिता के साथ हो। विभाग को यह पता चल सके कि किस निवेशक ने कितनी सिक्योरिटीज होल्ड कीं, कितना ब्याज मिला और कितना कैपिटल गेन हुआ। इससे गलत क्लेम और टैक्स चोरी की संभावना कम होगी।

व्यावहारिक उदाहरण

मान लीजिए एक FPI के पास 1 अप्रैल 2026 को ₹50 करोड़ के Treasury Bills हैं। साल के दौरान उसने ₹20 करोड़ और खरीदे और ₹10 करोड़ बेचे। साल के अंत में होल्डिंग ₹60 करोड़ रह गई। उसे ₹2.5 करोड़ ब्याज मिला और ₹1 करोड़ कैपिटल गेन हुआ।

अब उसे Form 173A में हर ISIN के हिसाब से ये आंकड़े डालने होंगे। अगर कोई डिटेल गलत या अधूरी दी गई, तो छूट का दावा रिजेक्ट हो सकता है या बाद में नोटिस आ सकता है।

बिजनेस और निवेशकों के लिए व्यावहारिक सलाह

  1. रिकॉर्ड सही रखें – ISIN, खरीद-बिक्री की डेट, वैल्यू और ब्याज की डिटेल पहले से तैयार रखें। साल के अंत में जल्दबाजी में गलती न हो।
  2. CA या टैक्स एडवाइजर से सलाह लें – खासकर FPI/FII के मामले में। फॉर्म भरने का सही तरीका और डिक्लेरेशन का महत्व समझें।
  3. समय पर फाइल करें – नियम 19 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गए हैं। आने वाले रिटर्न फाइलिंग में यह फॉर्म जरूरी होगा।
  4. पारदर्शिता अपनाएं – सही जानकारी देने से भविष्य में कम सवाल-जवाब होंगे। गलत डिक्लेरेशन से पेनल्टी का खतरा रहता है।
  5. अन्य संबंधित बदलावों पर नजर रखें – साथ ही CBDT ने कुछ बॉन्ड्स (जैसे Maharajah INR Bonds) पर TDS से छूट भी दी है। ये दोनों बदलाव विदेशी निवेश के माहौल को बेहतर बनाने की कोशिश हैं।

निष्कर्ष

Form 173A एक छोटा सा फॉर्म लग सकता है, लेकिन यह बड़े बदलाव का हिस्सा है। Income-tax Act, 2025 के साथ सरकार टैक्स सिस्टम को और स्पष्ट और डेटा-बेस्ड बनाने की कोशिश कर रही है। विदेशी निवेशकों के लिए यह थोड़ी अतिरिक्त कंप्लायंस है, लेकिन सही तरीके से किया जाए तो छूट का फायदा आसानी से मिल सकता है।

भारतीय बिजनेस और टैक्स प्रोफेशनल्स के लिए यह संकेत है कि नए टैक्स कानून के तहत रिपोर्टिंग और डिसक्लोजर की मांग बढ़ रही है। समय रहते तैयारी कर लें तो कंप्लायंस आसान रहेगा।

स्रोत / रेफरेंस:

  • Business Standard (20 अक्टूबर 2026) – CBDT notifies new form for tax exemption claims on govt securities
  • The Economic Times (20-21 अक्टूबर 2026) – Form 173A संबंधी कई रिपोर्ट्स
  • CBDT Notification No. 137/2026 dated 19 October 2026 (Income-tax Seventh Amendment Rules, 2026)
  • CNBC TV18 और Times Now की रिपोर्ट्स (21 अक्टूबर 2026)

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